मंगलवार, 24 जुलाई 2012

हम क्यूँ हाथ जोड़ना भूल गए ?

इतना क्यों ऊपर उठे कि,
खुद को धरती से जोड़ना भूल गए ?
सर उठाना तो याद रहा पर,
हम क्यूँ हाथ जोड़ना भूल गए ?
जंजीरों को तो तोड़ा हमने पर,
क्यूँ दीवारें तोड़ना भूल गए ?
आँख मिलाना रास रहा पर,
हम क्यूँ हाथ जोड़ना भूल गए ?
रिश्तों के लिए क्यूँ अब हम,
मौसमों को मोड़ना भूल गए ?
आज भी दुखता है मन कि,
हम क्यूँ हाथ जोड़ना भूल गए ?
- अक्षत डबराल
"निःशब्द"

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